मंदिर के पास घर बनवाने से क्या होता है, मंदिर के पास क्या नहीं रहना चाहिए?

बहुत से वास्तु शास्त्र के विद्वान मानते हैं कि मंदिर के पास घर नहीं बनवाना चाहिए। क्या सच में मंदिरों के पास घर लेने से समस्या होती है? क्या मंदिर के पास नहीं रहना चाहिए? क्या मंदिरों के पास घर बनवाने से व्यक्ति का विकास रूक जाता है? ऐसे ही सवालों का जवाब आइए जानते हैं।

दरअसल, मंदिर के पास मकान बनवाने या लेने वक्त उसकी दिशा का ध्यान रखना चाहिए। मंदिर के पास आपका घर है तो यह अति उत्तम है। थोड़ा दूर है मंदिर से तो मध्यम और ऐसी जगह पर घर है जहां से मंदिर दिखाई नहीं देता है या फिर मंदिर की घंटी की आवाज सुनाई नहीं देती है तो वह जगह सही नहीं है या निम्नतम है।

घर हमेशा मंदिर से उतनी दूरी पर बनवाना चाहिए, जहां से मंदिर दिखे और मंदिर की घंटी की आवाज भी सुनाई दे। घर हमेशा मंदिर से इतनी दूर होना चाहिए कि आपके दैनिक कार्यों का मंदिर की गतिविधि पर असर ना हो और मंदिर के कार्यों से आपका जीवन प्रभावित ना हो।

आजकल कई शहरों में कई छोटे-बड़े धार्मिक स्थल होते हैं। इन धार्मिक स्थलों के आसपास कई घर और घनी आबादी भी होते हैं, दुकानें होती है। ऐसी जगहों पर व्यवसाय खूब होता है और वहां पर रहने वाले लोग खुब तरक्की करते हैं। कई लोगों का तर्क होता है कि धार्मिक स्थल पर शोरगुल ज्यादा होता है और उससे वे परेशान होते हैं, लेकिन यह सही नहीं है।

मंदिरों की नगरी मथुरा, उज्जैन, हरिद्वार आदी जगरों पर हर घर के पास एक मंदिर है। लेकिन फिर भी वहां के लोग बहुत ही शांत चित्त एवं आध्यात्मिक रूप से संपन्न हैं। इसलिए मंदिर के पास घर बनाने से कोई नुकसान नहीं होता है। बस एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि वहां पर भी वास्तु का ख्याल जरूर रखना चाहिए।

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