साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंची मंहगाई,  टूट रही आम जनता की कमर

देशभर में मंहगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। बीते महीने में जनता को मंहगाई (Inflation) का एक और झटका लगा है। खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में सालाना आधार पर बढ़कर 7.79 फीसद हो गई है, जो कि पिछले 8 सालों में सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। खाघ पदार्थो की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी है, और यह लगातार चौथे महीने रिजर्व बैंक के लक्ष्य की ऊपरी सीमा से अधिक रही है।

मंहगाई डायन ने तोड़ी जनता की कमर

रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग हर चीज के दाम में काफी उछाल आया देखने को मिल रहा है। खाने के तेल के दाम एक महीने में 17.28 प्रतिशत बढ़ गए है, सब्जियों के दाम 15.41 प्रतिशत बढ़ गए, मसालों के दाम 10.56 प्रतिशत बढ़ गए और मांस-मछली के दाम 6.97 प्रतिशत बढ़ गए। स्वास्थ्य से जुड़ी चीजों के दाम 7.21 प्रतिशत बढ़ गए और यातायात और संचार से जुड़ी चीजों के दाम 10.91 प्रतिशत बढ़ गए। इसके साथ ही ईधन के दामों में भी 10.80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। ईंधन के दाम 10.80 प्रतिशत बढ़ गए हैं. कपड़ों और जूते-चप्पलों के दाम भी 9.85 प्रतिशत बढ़ गए हैं। फलों के दाम भी 4.99 प्रतिशत बढ़ गए हैं। 

ताजें आकड़ों के मुताबिक

गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ो के मुताबिक, मार्च 2021 औघोगिक उत्पादन 2.4 फीसद बढ़ा था। वहीं इस साल फरवरी में महामारी की तीसरी लहर के बीच औघोगिक उत्पादन की वृद्धि 1.5 फीसद रही थी। पिछले साल नवंबर और दिसंबर में औघोगिक उत्पादन मात्र एक फीसद बढ़ा था। वहीं मार्च-2022 के आंकड़ो के अनुसार, 4 फीसदी खनन बढ़ा है। हालांकि सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है, कि मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत के स्तर पर रहे, जिसमें ऊपर-नीचे दो प्रतिशत तक घट-बढ़ हो सकती है।

साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंची मंहगाई,  टूट रही आम जनता की कमर

बढ़ सकते हैं प्याज के दाम

अब अनुमान लगाया जा रहा है कि मंहगाई (Inflation) पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अगले महीने अपनी नीतिगत समीक्षा के दौरान प्याज के दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। महंगाई (Inflation) बढ़ने के कारण लोग अब लोग खरीदारी कम कर रहे हैं। वही कंपनियां भी अब मार्केट में अपने सामान को बेचने के लिए अलग-अलग तौर-तरीके अपना रही हैं।

साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंची मंहगाई,  टूट रही आम जनता की कमर

बता दें कि, भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने एक ट्वीट में कहा कि रुपये के गिरते मूल्य की वजह से एक तरह से भारत में महंगाई (Inflation) का आयात भी हो रहा है, जिसे रोकने की जरूरत है। विपक्षी पार्टियों ने भी बढ़ती महंगाई दर को लेकर सरकार की आलोचना की है।

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